kavita
कविता

नमन हैं वीर शहीदो का,जिन्होंने माटी का कर्ज़ चुकाया है !
शहीद होकर भी ,अमर रहे धरती माँ ने इन्हे बुलाया है !!
हे वीर माँ के शूरे वीर, जीना तुम्से ही सीखा है !
५६ इंच की असली छाती, मैने तुझमे ही देखा है !!
मोह नहीं जवानी का,तूने गोरो से लोहा मनवाया है !
गोरो के छक्के छूटे ,जब देश से मोह लगाया है !!
सूर्य जैसा तेज तुझमे ,तुम नमन के लायक हो !
जो कर दिखाया रण भूमि में ,तुम बंदन के लायक हो !!
पुरे देश में गुज रहा है ,इंकलाब की सांस है !
अंत समय में वीर बोला ,माँ के दूध की अंतिम आस है !!
== आशुतोष कन्नौजिया
नमन हैं वीर शहीदो का,जिन्होंने माटी का कर्ज़ चुकाया है !
शहीद होकर भी ,अमर रहे धरती माँ ने इन्हे बुलाया है !!
हे वीर माँ के शूरे वीर, जीना तुम्से ही सीखा है !
५६ इंच की असली छाती, मैने तुझमे ही देखा है !!
मोह नहीं जवानी का,तूने गोरो से लोहा मनवाया है !
गोरो के छक्के छूटे ,जब देश से मोह लगाया है !!
सूर्य जैसा तेज तुझमे ,तुम नमन के लायक हो !
जो कर दिखाया रण भूमि में ,तुम बंदन के लायक हो !!
पुरे देश में गुज रहा है ,इंकलाब की सांस है !
अंत समय में वीर बोला ,माँ के दूध की अंतिम आस है !!
== आशुतोष कन्नौजिया
Hi
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