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Tik tok टिक टॉक (भारत मे आने का रास्ता साफ)

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Tik tok (टिक टॉक) TIK TOK का भारत मे आने का रास्ता साफ हालही में अमेरिका ने टिक टॉक को अपने देश मे नामंजूरी देदी जिससे चीनी कंपनी को बड़ा झटका लगा पहले भारत और अब USA में भी tik tok को बंद कर दिया गया है।   लेकिन भारत और अन्य देश जहा टिक टॉक पर रोक लगा है उनके लिए बड़ी खुसी की बात है। दरहसल tik tok "बाइटडांस" कंपनी का प्रोडक्ट है ( बाइटडान्स मनोरंजन के लिए aap बनाती है) जिसे अमेरिका के "ओरेकल कम्पनी" ORACLE ने उसे खरीद लिया ताकि USA में tik tok चलता रहे। मगर जैसे ही ये बात अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प महोदय को पता चला उन्होंने इसे ना मंजूरी देदी। मगर बाद में ट्रम्प ने उसपर बिचार करने को कहा और अपने देश के लोगो को संबोधित करते हो बोले "राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है जांच परख के ही आगे के कदम उठाया जाए गया" दरहसल ट्रम्प को डर है कि हमारे यूजरो की कोई भी जानकारी बाहर ना लीक हो इस लिए ये सब करना पड़ रहा है  आप को बताते चले जैसे ही tik tok को USA में परमिशन मिल जाता है कुछ ही दिनों में माइक्रोसॉफ्ट उसे भारत के लिए बेचे गया जब ये app अमेरिकन हो जाये गा तब बड़े आसानी स...

प्रणव कुमार मुखर्जी ( parnav kumar mukharji)

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 प्रणव कुमार मुखर्जी नमस्कार ।  आज मै बड़ा दुखी हूं, हमारे बीच भारत के 13 वे पूर्व रास्ट्रपति (प्रथम नागरिक) प्रणव मुखर्जी नही रहे, इनका जाना राजनीति के एक अध्याय पर पूर्ण विराम लग जाना जैसा है, हमे गर्व है ऐसे वयक्तिव का जिनका वास भारत है, भारत देश सदा आप का आभारी रहे गया, जो पद चिन्ह आप ने छोड़ा है सदा ही आप के राजनीतिक अनुजों को एक अच्छा और स्पष्ट शिख देता रहे गया। तो आइये हम इनके जीवन के  बरे में कुछ जानते है। नाम -प्रणव मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 में गांव मिराती, जिला बीरभूम, पश्चिम बंगाल में हुआ था, ये बचपन से ही एक रानीतिक परिवार में पले बढ़े, ये प्रारंभ से ही धार्मिक बिचर के थे, इनकि मृत्यु 31 अगस्त 2020 नई दिल्ली में हुआ था। परिवार प्रणव मुखर्जी के पिता  कामदा किंकर मुखर्जी तथा माता राजलक्ष्मी मुखर्जी थी, इनके पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे, उसी वक्त ब्रिटिश सरकार के खिलाफ खड़ा होने पर उन्हें कई वर्षों तक जेल में रखा गया, बाद में रिहा होने के बाद वह पश्चिम बंगाल बिधान परिषद में 1952-1964 तक सदस्य रहे। प्रणव मुखर्जी का विवाह जुलाई 1957 में सुभ्रा मुखर्जी से हुआ...

कविता "शुखि रोटी"

           सुखी रोटी 1,,सुखी  रोटी  भीगोकर ,उन्हें  खाते  हमने  देखा  हैं।    गिरे हुए दाने उठाकर ,अपना भूख मिटाते देखा हैं।।    जिन्दगी  के इस दौर में,सिर पर छाया नही फिर भी ,    काटो के बिस्तर पर ,सुकून से सोते हुए उन्हें देखा हैं।    सुखी रोटी  भिगोकर  ,उन्हें  खाते  हमने  देखा  हैं।। 2,,        तन  पर फटे लिबास, फिर भी लाज छिपाते देखा हैं।             नम भारी आँखे होने पर भी ,मुस्कुराते हुए  देखा हैं।।          चंद सिक्को की बात नही है जनाब,स्वार्थपूर्ण संसार में,             अपने  हिस्से  का  भी , औरो  को  देते  हुए  देखा हैं।             सुखी  रोटी  भिगोकर , उन्हें  खाते  हमने देखा  हैं।। 3,,स्वाभिमान के लिये ,परिस्तिथियों से लड़ते देखा हैं। कठिनाई...

15 अगस्त स्पेसल "आजाद भारत मे इनकी भी बड़ी भूमिका"

 आजाद भारत में इनकी भी बड़ी भूमिका आजाद भारत में इनकी भी बड़ी भूमिका 1947 से भारत में हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। लंबे संघर्षो के बाद भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली थी।लेकिन आज बात कुछ और करते है।  15 अगस्त या 26 जनवरी आते ही हमारे मन में देश के लिए शाहिद हुए सभी जवानों को याद करने की चेष्ठा जाग्रत होती है। चाहे वो  स्वतंत्रता सेनानी या देश के अंदर तैनात जवान हो या फिर सीमा पर खडे जवान, लेकिन कुछ लोग और भी हैं, जिन्हें हमे भूलना नही चाहिए । जिसका बहुत बड़ा योगदान होता है ऐसे वीरो को जन्म देने के लिए , जी हा मै उसी माँ की बात कर रहा हु ,जो देश के खातिर सबसे पहले अपने वीरो को आगे खड़ा करती हैं। यकीन मानिये इनका हृदय आसमान से बड़ा और सागर से भी गहरा होता है ।तभी तो वो अपने वीर पुत्रो को देश सेवा के लिए भेजती है। आप ने कभी सोचा है जब इस माई का सपूत ,तिरंगे में लिपटा घर आता हैं। उनकी तो दुनिया ही उजड़ जाती है।उन्हें पैसे से ज्यादा अपनो को खोने की परवाह होती है । बुढ़ापे का सहारा बनाने वाला आज खुद चार कंधो पर आया हैं । उस माँ के कई सपने आज इसी तिरंगे...