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कविता "शुखि रोटी"

           सुखी रोटी 1,,सुखी  रोटी  भीगोकर ,उन्हें  खाते  हमने  देखा  हैं।    गिरे हुए दाने उठाकर ,अपना भूख मिटाते देखा हैं।।    जिन्दगी  के इस दौर में,सिर पर छाया नही फिर भी ,    काटो के बिस्तर पर ,सुकून से सोते हुए उन्हें देखा हैं।    सुखी रोटी  भिगोकर  ,उन्हें  खाते  हमने  देखा  हैं।। 2,,        तन  पर फटे लिबास, फिर भी लाज छिपाते देखा हैं।             नम भारी आँखे होने पर भी ,मुस्कुराते हुए  देखा हैं।।          चंद सिक्को की बात नही है जनाब,स्वार्थपूर्ण संसार में,             अपने  हिस्से  का  भी , औरो  को  देते  हुए  देखा हैं।             सुखी  रोटी  भिगोकर , उन्हें  खाते  हमने देखा  हैं।। 3,,स्वाभिमान के लिये ,परिस्तिथियों से लड़ते देखा हैं। कठिनाई...

15 अगस्त स्पेसल "आजाद भारत मे इनकी भी बड़ी भूमिका"

 आजाद भारत में इनकी भी बड़ी भूमिका आजाद भारत में इनकी भी बड़ी भूमिका 1947 से भारत में हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। लंबे संघर्षो के बाद भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली थी।लेकिन आज बात कुछ और करते है।  15 अगस्त या 26 जनवरी आते ही हमारे मन में देश के लिए शाहिद हुए सभी जवानों को याद करने की चेष्ठा जाग्रत होती है। चाहे वो  स्वतंत्रता सेनानी या देश के अंदर तैनात जवान हो या फिर सीमा पर खडे जवान, लेकिन कुछ लोग और भी हैं, जिन्हें हमे भूलना नही चाहिए । जिसका बहुत बड़ा योगदान होता है ऐसे वीरो को जन्म देने के लिए , जी हा मै उसी माँ की बात कर रहा हु ,जो देश के खातिर सबसे पहले अपने वीरो को आगे खड़ा करती हैं। यकीन मानिये इनका हृदय आसमान से बड़ा और सागर से भी गहरा होता है ।तभी तो वो अपने वीर पुत्रो को देश सेवा के लिए भेजती है। आप ने कभी सोचा है जब इस माई का सपूत ,तिरंगे में लिपटा घर आता हैं। उनकी तो दुनिया ही उजड़ जाती है।उन्हें पैसे से ज्यादा अपनो को खोने की परवाह होती है । बुढ़ापे का सहारा बनाने वाला आज खुद चार कंधो पर आया हैं । उस माँ के कई सपने आज इसी तिरंगे...

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                                                                            कविता                                        नमन हैं वीर शहीदो का,जिन्होंने माटी का कर्ज़ चुकाया है !                                                             शहीद होकर भी ,अमर रहे धरती माँ ने इन्हे बुलाया है !! ...